07 जुलाई, 2009

बरखा बहार कब आएगी

एक समय था जब आषाढ के लगते लगते तो बारिश का वो मनोरम नजारा देखने को मिल जाता था कि मन प्रफुल्लित हो उठता था। पिछले कुछ वर्षों से ऐसा नजारा नहीं दिखाई दिया। इस वर्ष भी मानसून आराम कर रहा है तो आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इन दिनों आषाढ लग गया परंतु बरसात नहीं आई। अब लोगों की चिंताएं भी बढ गई हैं।
कुछ ऐसे ही नजारे इन दिनों डूंगरपुर क्षेञ के हैं




8 टिप्‍पणियां:

  1. भाई कमलेश जी, मजा आ गया ब्लॉग जगत में अपने डूंगरपुर को देखकर. आपकी लेखनी का नाम सुना था , आज रू -ब-रू भी हो गए. कृपया इसे जारी रखिए.
    सादर शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  2. Bahut sundear rachana...wow thats great...
    Really nice...
    Regards..
    DevSangeet

    उत्तर देंहटाएं
  3. हिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |

    उत्तर देंहटाएं
  4. स्वागत है आपका,
    कब आवोगो रे बदरवा
    कब जल बरसावोगे रे बदरवा
    प्यासा जीवन प्यासा ये मन
    क्या आंसुओं से भिगावों गे रे तन
    ऐ बदरवा

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    उत्तर देंहटाएं