12 सितंबर, 2009

राजसिंह डूंगरपुर का जीवन परिचय

विश्वप्रसिद्ध क्रिकेट समीक्षक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह डूँगरपुर का जन्म डूँगरपुर के पूर्व महारावल लक्ष्मणसिंह के तीसरे पुत्र के रूप में 19 दिसम्बर 1935 को हुआ था। एक क्रिकेट खिलाडी, कमेन्टेटर, समीक्षक एवं प्रशासक के रूप में क्रिकेट जगत को कई दशकों तक अपनी सेवाएं देने वाले राजसिंह डूँगरपुर ने अपनी शिक्षा मेयो कॉलेज अजमेर व डेली कॉलेज इन्दौर से प्राप्त की।
एन.पी.केसरी से प्रशिक्षित राजसिंह डूँगरपुर से रणजी ट्राफी में वर्ष 1955-56 में इन्दौर में मध्य भारत की ओर से मध्यप्रदेश के खिलाफ खेलते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकट की शुरूआत की और अगले 16 वर्षों तक मध्यम गति के तेज गेंदबाज के रूप में प्रदेश व देश के विभिन्न खेल मैदानों पर अपनी गेंदबाजी के जौहर दिखाए। उन्होने दिलीप ट्राफी के 11 मैचों एवं 1960-61 में एमसीसी इग्लेण्ड के विरूद्ध भी श्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
क्रिकेट जगत में ‘राजभाई’ के नाम से पहचाने जाने वाले राजसिंह डूंगरपुर ने 60 रणजी ट्राफी मैचों में खेलकर 182 विकेट लिए व 991 रन बनाए। उनकी श्रेष्ठ गेंदबाजी 55 रन पर 5 विकेट एवं 88 रन पर 7 विकेट 1967-68 में विदर्भ के खिलाफ रही। उन्होंने 1962-63 से 65-66 तक 19 मैचों में राजस्थान टीम का नेतृत्व किया जिसमें राजस्थान तीन बार रणजी ट्राफी का उपविजेता रहा। वर्ष 1973 में क्रिकेट क्लब ऑफ इण्डिया की एक्जीक्यूटीव कमेटी के सदस्य बने राजसिंह वर्ष 1992 से अनवरत क्लब के सदस्य थे। राजसिंह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की राष्ट्रीय चयन समिति में 1973 से 77 तक चयनकर्त्ता एवं वर्ष 1989-90 में अध्यक्ष रहे। उन्होंन भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान की। वर्ष 1979 में आस्ट्रेलिया व पाकिस्तान तथा 1982 व 1985 में इग्लेण्ड के खिलाफ खेले गए मैचों के साथ ही विदेशों में 1982 व 86 में इग्लेण्ड, 1986 में शारजाह तथा 1984 व 2005-06 में भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे पर वे मैनेजर रहे।
क्रिकेट प्रबन्धन के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवाओं व अनुभव के बूते वे 25 सितम्बर 1996 को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष चुने गए। वे एम.सी.सी. के सदस्य तथा सर्रे क्रिकेट क्लब इण्लेण्ड के एक मात्र भारतीय आजीवन सदस्य रहे।
राजस्थान राज्य क्रीडा परिषद् के अध्यक्ष रहे राजसिंह डूँगरपुर को ‘राजस्थान श्री’, डेलियन अवार्ड 1982 एवं जेम्सटॉड अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया था।
आज दिनांक 12 सितम्बर 2009 को उनके आकस्मिक निधन पर समूचा डूंगरपुर उन्हें आत्मीय श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
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राजसिंह डूंगरपुर की चिञमय स्‍मृतियां
डूंगरपुर में फरवरी 2001 में भूकम्‍प पीडि़तों की सहायतार्थ आयोजित ईग्‍लेण्‍ड के आईजिंगारी क्रिकेट क्‍लब और स्‍थानीय क्‍लब के बीच आयोजित मैच में मेजबानी करते हुए राजसिंह डूंगरपुर कुछ यों दिखें।

डूंगरपुर प्रवास दौरान राजसिंह डूंगरपुर अपने मिञों से कुछ यों मिलते थे -

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3 टिप्‍पणियां:

  1. भारतीय क्रिकेट के शक्ति स्तंभ को श्रधांजलि...
    नीरज

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  2. ईश्वर उन्हें अपने प्रकाश में समा ले
    और दादा की पवित्र आत्मा को वैकुण्ठ लोक मिलेगा
    ये मेरा विशवास है !
    मेरे दादा जैसा सच्चा और वीर - धीर और सदाचारी महापुरुष ,
    आज तक मैंने देखा नहीं --
    दादा सर से पैर तक,
    एक सज्जन पुरुष थे और नस नस में राजसी शौर्य और उदारता उनमे भरी हुई थी -
    - दादा मेरी स्मृतियों में ही नहीं
    सदा अमर रहेंगें ..

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